🌐 भारत (डिफ़ॉल्ट)
🕉️ हिंदू पंचांग

आज का पंचांग

सोमवार 🌙  |  09 February 2026

विक्रम संवत् 2083  |  शक संवत् 1948  |  माह: मकर / पौष  |  कृष्ण पक्ष 🌘

🌟 पंचांग के पाँच अंग

🌙
तिथि (सूर्योदय पर)
अष्टमी
कृष्ण पक्ष 🌘 • 8वीं
7% पूर्ण
⏱ समाप्ति: 7:30 AM
तत्पश्चात् नवमी
☀️
वार
सोमवार 🌙
स्वामी: चंद्र
नक्षत्र
विशाखा
देवता: इंद्राग्नि
6% पूर्ण
योग
वृद्धि
शुभ योग
🌀
करण
बव
अर्ध तिथि
🧭 आज का दिशा-शूल
दिशा: पूर्व
परिहार (उपाय): दर्पण देखकर या दूध पीकर निकलें

आज पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचें। अत्यंत आवश्यक हो तो उपाय करके निकलें।

🍃 ऋतु एवं अयन
दृक् ऋतु: शिशिर
वैदिक ऋतु: हेमंत
सूर्य अयन: उत्तरायण ☀️

⏳ आज का चौघड़िया

शुभ कार्य प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त समय चुनें।

☀️ दिन का चौघड़िया

  • अमृत (शुभ) 6:47 AM – 8:12 AM
  • काल (अशुभ) 8:12 AM – 9:38 AM
  • शुभ (उत्तम) 9:38 AM – 11:03 AM
  • रोग (अशुभ) 11:03 AM – 12:28 PM
  • उद्वेग (अशुभ) 12:28 PM – 1:54 PM
  • चर (सामान्य) 1:54 PM – 3:19 PM
  • लाभ (शुभ) 3:19 PM – 4:44 PM
  • अमृत (शुभ) 4:44 PM – 6:10 PM

🌙 रात का चौघड़िया

  • चर (सामान्य) 6:10 PM – 7:44 PM
  • लाभ (शुभ) 7:44 PM – 9:19 PM
  • अमृत (शुभ) 9:19 PM – 10:54 PM
  • काल (अशुभ) 10:54 PM – 12:28 AM
  • शुभ (उत्तम) 12:28 AM – 2:03 AM
  • रोग (अशुभ) 2:03 AM – 3:38 AM
  • उद्वेग (अशुभ) 3:38 AM – 5:12 AM
  • चर (सामान्य) 5:12 AM – 6:47 AM

🌞 सूर्य एवं चंद्र

🌅
सूर्योदय
6:47 AM
🌇
सूर्यास्त
6:10 PM
🌕
चंद्र अवस्था
घटता 🌖
सूर्य राशि
मकर
🌙
चंद्र राशि
तुला
🔢
चंद्र अंशांश (निरयण)
200.86°

⏰ मुहूर्त एवं काल

🚫राहुकाल
8:12 AM – 9:38 AM

इस समय महत्वपूर्ण कार्य न करें।

⚠️यमगण्ड काल
11:03 AM – 12:28 PM

यमगण्ड काल में यात्रा व नए कार्य का प्रारंभ वर्जित।

🌑गुलिक काल
1:54 PM – 3:19 PM

शनि पुत्र गुलिक का काल — शुभ कार्य न करें।

अभिजित मुहूर्त
12:06 PM – 12:51 PM

दिन का सबसे शुभ मुहूर्त — सूर्य मध्याह्न।

ब्रह्म मुहूर्त
5:06 AM – 5:57 AM

ध्यान, पूजा, अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ।

🙏संध्या काल
6:10 PM के आसपास

संध्या वंदन व दीप प्रज्वलन शुभ।

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✨ आज का सुविचार

करुणा के पथ पर नित्य चलने वाला महान बनता है।
सुख केवल करुणा से ही प्राप्त होती है।

नित्य करुणा का अभ्यास करें।

— गीता — 09 February 2026 का संदेश

मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः। — मन ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण है।

— अमृतबिंदु उपनिषद् २