🌐 भारत (डिफ़ॉल्ट)
🕉️ हिंदू पंचांग

आज का पंचांग

बुधवार 💚  |  11 February 2026

विक्रम संवत् 2083  |  शक संवत् 1948  |  माह: मकर / पौष  |  कृष्ण पक्ष 🌘

🌟 पंचांग के पाँच अंग

🌙
तिथि
दशमी
कृष्ण पक्ष 🌘 • 10वीं
6% पूर्ण
☀️
वार
बुधवार 💚
स्वामी: बुध
नक्षत्र
ज्येष्ठा
देवता: इंद्र
2% पूर्ण
⚠️
योग
व्याघात
अशुभ योग
🌀
करण
गर
अर्ध तिथि
🧭 आज का दिशा-शूल
दिशा: उत्तर
परिहार (उपाय): धनिया या तिल खाकर निकलें

आज उत्तर दिशा में यात्रा करने से बचें। अत्यंत आवश्यक हो तो उपाय करके निकलें।

🍃 ऋतु एवं अयन
दृक् ऋतु: शिशिर
वैदिक ऋतु: हेमंत
सूर्य अयन: उत्तरायण ☀️

⏳ आज का चौघड़िया

शुभ कार्य प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त समय चुनें।

☀️ दिन का चौघड़िया

  • लाभ (शुभ) 6:46 AM – 8:12 AM
  • अमृत (शुभ) 8:12 AM – 9:37 AM
  • काल (अशुभ) 9:37 AM – 11:03 AM
  • शुभ (उत्तम) 11:03 AM – 12:28 PM
  • रोग (अशुभ) 12:28 PM – 1:54 PM
  • उद्वेग (अशुभ) 1:54 PM – 3:20 PM
  • चर (सामान्य) 3:20 PM – 4:45 PM
  • लाभ (शुभ) 4:45 PM – 6:11 PM

🌙 रात का चौघड़िया

  • उद्वेग (अशुभ) 6:11 PM – 7:45 PM
  • चर (सामान्य) 7:45 PM – 9:20 PM
  • लाभ (शुभ) 9:20 PM – 10:54 PM
  • अमृत (शुभ) 10:54 PM – 12:28 AM
  • काल (अशुभ) 12:28 AM – 2:03 AM
  • शुभ (उत्तम) 2:03 AM – 3:37 AM
  • रोग (अशुभ) 3:37 AM – 5:12 AM
  • उद्वेग (अशुभ) 5:12 AM – 6:46 AM

🌞 सूर्य एवं चंद्र

🌅
सूर्योदय
6:46 AM
🌇
सूर्यास्त
6:11 PM
🌕
चंद्र अवस्था
अंतिम चतुर्थांश 🌗
सूर्य राशि
मकर
🌙
चंद्र राशि
वृश्चिक
🔢
चंद्र अंशांश (निरयण)
226.97°

⏰ मुहूर्त एवं काल

🚫राहुकाल
12:28 PM – 1:54 PM

इस समय महत्वपूर्ण कार्य न करें।

⚠️यमगण्ड काल
8:12 AM – 9:37 AM

यमगण्ड काल में यात्रा व नए कार्य का प्रारंभ वर्जित।

🌑गुलिक काल
11:03 AM – 12:28 PM

शनि पुत्र गुलिक का काल — शुभ कार्य न करें।

अभिजित मुहूर्त
बुधवार — अभिजित निषिद्ध है (ज्योतिष परंपरा)

दिन का सबसे शुभ मुहूर्त — सूर्य मध्याह्न।

ब्रह्म मुहूर्त
5:05 AM – 5:56 AM

ध्यान, पूजा, अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ।

🙏संध्या काल
6:11 PM के आसपास

संध्या वंदन व दीप प्रज्वलन शुभ।

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✨ आज का सुविचार

शांति को साधने से ही आत्मा को मुक्ति की प्राप्ति होती है।
शांति का कोई विकल्प नहीं।

आज शांति में एक कदम आगे बढ़ाएं।

— उपनिषद् — 11 February 2026 का संदेश

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी। — माता और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान हैं।

— वाल्मीकि रामायण