🕉️ हिंदू पंचांग
आज का पंचांग
बुधवार 💚 | 18 February 2026
विक्रम संवत् 2083 | शक संवत् 1948 | माह: कुम्भ / माघ | शुक्ल पक्ष 🌒
🌟 पंचांग के पाँच अंग
🌙
तिथि
प्रतिपदा
शुक्ल पक्ष 🌒 • 1वीं
76% पूर्ण
☀️
वार
बुधवार 💚
स्वामी: बुध
⭐
नक्षत्र
शतभिषा
देवता: वरुण
59% पूर्ण
✅
योग
शिव
शुभ योग
🌀
करण
बालव
अर्ध तिथि
🧭 आज का दिशा-शूल
दिशा: उत्तर
परिहार (उपाय): धनिया या तिल खाकर निकलें
आज उत्तर दिशा में यात्रा करने से बचें। अत्यंत आवश्यक हो तो उपाय करके निकलें।
🍃 ऋतु एवं अयन
दृक् ऋतु:
शिशिर
वैदिक ऋतु:
शिशिर
सूर्य अयन:
उत्तरायण ☀️
⏳ आज का चौघड़िया
शुभ कार्य प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त समय चुनें।
☀️ दिन का चौघड़िया
- लाभ (शुभ) 6:42 AM – 8:09 AM
- अमृत (शुभ) 8:09 AM – 9:35 AM
- काल (अशुभ) 9:35 AM – 11:02 AM
- शुभ (उत्तम) 11:02 AM – 12:28 PM
- रोग (अशुभ) 12:28 PM – 1:55 PM
- उद्वेग (अशुभ) 1:55 PM – 3:21 PM
- चर (सामान्य) 3:21 PM – 4:48 PM
- लाभ (शुभ) 4:48 PM – 6:14 PM
🌙 रात का चौघड़िया
- उद्वेग (अशुभ) 6:14 PM – 7:48 PM
- चर (सामान्य) 7:48 PM – 9:21 PM
- लाभ (शुभ) 9:21 PM – 10:55 PM
- अमृत (शुभ) 10:55 PM – 12:28 AM
- काल (अशुभ) 12:28 AM – 2:02 AM
- शुभ (उत्तम) 2:02 AM – 3:35 AM
- रोग (अशुभ) 3:35 AM – 5:09 AM
- उद्वेग (अशुभ) 5:09 AM – 6:42 AM
🌞 सूर्य एवं चंद्र
सूर्योदय
6:42 AM
सूर्यास्त
6:14 PM
चंद्र अवस्था
अमावस्या 🌑
सूर्य राशि
कुम्भ
चंद्र राशि
कुम्भ
चंद्र अंशांश (निरयण)
314.53°
⏰ मुहूर्त एवं काल
🚫राहुकाल
12:28 PM – 1:55 PM
इस समय महत्वपूर्ण कार्य न करें।
⚠️यमगण्ड काल
8:09 AM – 9:35 AM
यमगण्ड काल में यात्रा व नए कार्य का प्रारंभ वर्जित।
🌑गुलिक काल
11:02 AM – 12:28 PM
शनि पुत्र गुलिक का काल — शुभ कार्य न करें।
✨अभिजित मुहूर्त
बुधवार — अभिजित निषिद्ध है (ज्योतिष परंपरा)
दिन का सबसे शुभ मुहूर्त — सूर्य मध्याह्न।
�ब्रह्म मुहूर्त
5:02 AM – 5:52 AM
ध्यान, पूजा, अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ।
🙏संध्या काल
6:14 PM के आसपास
संध्या वंदन व दीप प्रज्वलन शुभ।
✨ आज का सुविचार
❝
धर्म और विनम्रता — यही दो मनुष्य जीवन के पथ हैं।
इन दोनों को साधने वाला सफलता को प्राप्त होता है।
आज धर्म और विनम्रता दोनों पर ध्यान दें।
— ऋग्वेद — 18 February 2026 का संदेश
❝
आत्मा वा अरे द्रष्टव्यः श्रोतव्यो मन्तव्यः। — आत्मा को देखना, सुनना और विचार करना ही साधना है।
— बृहदारण्यक उपनिषद्