🌐 भारत (डिफ़ॉल्ट)
🕉️ हिंदू पंचांग

आज का पंचांग

रविवार ☀️  |  22 February 2026

विक्रम संवत् 2083  |  शक संवत् 1948  |  माह: कुम्भ / माघ  |  शुक्ल पक्ष 🌒

🌟 पंचांग के पाँच अंग

🌙
तिथि
षष्ठी
शुक्ल पक्ष 🌒 • 6वीं
1% पूर्ण
☀️
वार
रविवार ☀️
स्वामी: सूर्य
नक्षत्र
अश्विनी
देवता: अश्विनी कुमार
72% पूर्ण
योग
शुक्ल
शुभ योग
🌀
करण
किंस्तुघ्न
अर्ध तिथि
🧭 आज का दिशा-शूल
दिशा: पश्चिम
परिहार (उपाय): दलिया या घी खाकर निकलें

आज पश्चिम दिशा में यात्रा करने से बचें। अत्यंत आवश्यक हो तो उपाय करके निकलें।

🍃 ऋतु एवं अयन
दृक् ऋतु: शिशिर
वैदिक ऋतु: शिशिर
सूर्य अयन: उत्तरायण ☀️

⏳ आज का चौघड़िया

शुभ कार्य प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त समय चुनें।

☀️ दिन का चौघड़िया

  • उद्वेग (अशुभ) 6:39 AM – 8:06 AM
  • चर (सामान्य) 8:06 AM – 9:33 AM
  • लाभ (शुभ) 9:33 AM – 11:01 AM
  • अमृत (शुभ) 11:01 AM – 12:28 PM
  • काल (अशुभ) 12:28 PM – 1:55 PM
  • शुभ (उत्तम) 1:55 PM – 3:22 PM
  • रोग (अशुभ) 3:22 PM – 4:49 PM
  • उद्वेग (अशुभ) 4:49 PM – 6:16 PM

🌙 रात का चौघड़िया

  • शुभ (उत्तम) 6:16 PM – 7:49 PM
  • रोग (अशुभ) 7:49 PM – 9:22 PM
  • उद्वेग (अशुभ) 9:22 PM – 10:55 PM
  • चर (सामान्य) 10:55 PM – 12:28 AM
  • लाभ (शुभ) 12:28 AM – 2:01 AM
  • अमृत (शुभ) 2:01 AM – 3:33 AM
  • काल (अशुभ) 3:33 AM – 5:06 AM
  • शुभ (उत्तम) 5:06 AM – 6:39 AM

🌞 सूर्य एवं चंद्र

🌅
सूर्योदय
6:39 AM
🌇
सूर्यास्त
6:16 PM
🌕
चंद्र अवस्था
वक्र 🌒
सूर्य राशि
कुम्भ
🌙
चंद्र राशि
मेष
🔢
चंद्र अंशांश (निरयण)
9.57°

⏰ मुहूर्त एवं काल

🚫राहुकाल
4:49 PM – 6:16 PM

इस समय महत्वपूर्ण कार्य न करें।

⚠️यमगण्ड काल
12:28 PM – 1:55 PM

यमगण्ड काल में यात्रा व नए कार्य का प्रारंभ वर्जित।

🌑गुलिक काल
3:22 PM – 4:49 PM

शनि पुत्र गुलिक का काल — शुभ कार्य न करें।

अभिजित मुहूर्त
12:04 PM – 12:51 PM

दिन का सबसे शुभ मुहूर्त — सूर्य मध्याह्न।

ब्रह्म मुहूर्त
5:00 AM – 5:50 AM

ध्यान, पूजा, अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ।

🙏संध्या काल
6:16 PM के आसपास

संध्या वंदन व दीप प्रज्वलन शुभ।

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✨ आज का सुविचार

संयम को करने से ही जीवन को समृद्धि की प्राप्ति होती है।
संयम का कोई विकल्प नहीं।

आज संयम में एक कदम आगे बढ़ाएं।

— रामायण — 22 February 2026 का संदेश

दानं भोगो नाशस्त्रयो गतयो भवन्ति वित्तस्य। — धन की तीन गतियाँ हैं — दान, भोग और नाश।

— भर्तृहरि