🌐 भारत (डिफ़ॉल्ट)
🕉️ हिंदू पंचांग

आज का पंचांग

मंगलवार 🔴  |  03 March 2026

विक्रम संवत् 2083  |  शक संवत् 1948  |  माह: कुम्भ / माघ  |  शुक्ल पक्ष 🌒

🌟 पंचांग के पाँच अंग

🌙
तिथि
पूर्णिमा
शुक्ल पक्ष 🌒 • 15वीं
76% पूर्ण
☀️
वार
मंगलवार 🔴
स्वामी: मंगल
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी
देवता: भग
17% पूर्ण
योग
धृति
शुभ योग
🌀
करण
शकुनि
अर्ध तिथि
🚩 विशेष: 🌕 आज पूर्णिमा है - दान व स्नान का विशेष महत्व।
🧭 आज का दिशा-शूल
दिशा: उत्तर
परिहार (उपाय): गुड़ खाकर निकलें

आज उत्तर दिशा में यात्रा करने से बचें। अत्यंत आवश्यक हो तो उपाय करके निकलें।

🍃 ऋतु एवं अयन
दृक् ऋतु: वसंत
वैदिक ऋतु: शिशिर
सूर्य अयन: उत्तरायण ☀️

⏳ आज का चौघड़िया

शुभ कार्य प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त समय चुनें।

☀️ दिन का चौघड़िया

  • रोग (अशुभ) 6:33 AM – 8:01 AM
  • उद्वेग (अशुभ) 8:01 AM – 9:29 AM
  • चर (सामान्य) 9:29 AM – 10:58 AM
  • लाभ (शुभ) 10:58 AM – 12:26 PM
  • अमृत (शुभ) 12:26 PM – 1:54 PM
  • काल (अशुभ) 1:54 PM – 3:23 PM
  • शुभ (उत्तम) 3:23 PM – 4:51 PM
  • रोग (अशुभ) 4:51 PM – 6:20 PM

🌙 रात का चौघड़िया

  • काल (अशुभ) 6:20 PM – 7:51 PM
  • शुभ (उत्तम) 7:51 PM – 9:23 PM
  • रोग (अशुभ) 9:23 PM – 10:54 PM
  • उद्वेग (अशुभ) 10:54 PM – 12:26 AM
  • चर (सामान्य) 12:26 AM – 1:58 AM
  • लाभ (शुभ) 1:58 AM – 3:29 AM
  • अमृत (शुभ) 3:29 AM – 5:01 AM
  • काल (अशुभ) 5:01 AM – 6:33 AM

🌞 सूर्य एवं चंद्र

🌅
सूर्योदय
6:33 AM
🌇
सूर्यास्त
6:20 PM
🌕
चंद्र अवस्था
उत्तल 🌔
सूर्य राशि
कुम्भ
🌙
चंद्र राशि
सिंह
🔢
चंद्र अंशांश (निरयण)
135.54°

⏰ मुहूर्त एवं काल

🚫राहुकाल
3:23 PM – 4:51 PM

इस समय महत्वपूर्ण कार्य न करें।

⚠️यमगण्ड काल
9:29 AM – 10:58 AM

यमगण्ड काल में यात्रा व नए कार्य का प्रारंभ वर्जित।

🌑गुलिक काल
12:26 PM – 1:54 PM

शनि पुत्र गुलिक का काल — शुभ कार्य न करें।

अभिजित मुहूर्त
12:02 PM – 12:50 PM

दिन का सबसे शुभ मुहूर्त — सूर्य मध्याह्न।

ब्रह्म मुहूर्त
4:55 AM – 5:44 AM

ध्यान, पूजा, अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ।

🙏संध्या काल
6:20 PM के आसपास

संध्या वंदन व दीप प्रज्वलन शुभ।

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✨ आज का सुविचार

भक्ति और धैर्य — यही दो मनुष्य जीवन के औषधि हैं।
इन दोनों को साधने वाला मुक्ति को प्राप्त होता है।

आज भक्ति और धैर्य दोनों पर ध्यान दें।

— महाभारत — 03 March 2026 का संदेश

प्रज्ञानं ब्रह्म। — प्रज्ञा ही ब्रह्म है।

— ऐतरेय उपनिषद् ३.३