🌐 भारत (डिफ़ॉल्ट)
🕉️ हिंदू पंचांग

आज का पंचांग

सोमवार 🌙  |  16 March 2026

विक्रम संवत् 2083  |  शक संवत् 1948  |  माह: मीन / फाल्गुन  |  कृष्ण पक्ष 🌘

🌟 पंचांग के पाँच अंग

🌙
तिथि
त्रयोदशी
कृष्ण पक्ष 🌘 • 13वीं
7% पूर्ण
☀️
वार
सोमवार 🌙
स्वामी: चंद्र
नक्षत्र
धनिष्ठा
देवता: अष्टवसु
22% पूर्ण
योग
सिद्ध
शुभ योग
🌀
करण
किंस्तुघ्न
अर्ध तिथि
🚩 विशेष: 🔱 आज प्रदोष व्रत है - महादेव की कृपा प्राप्ति का दिन।
🧭 आज का दिशा-शूल
दिशा: पूर्व
परिहार (उपाय): दर्पण देखकर या दूध पीकर निकलें

आज पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचें। अत्यंत आवश्यक हो तो उपाय करके निकलें।

🍃 ऋतु एवं अयन
दृक् ऋतु: वसंत
वैदिक ऋतु: शिशिर
सूर्य अयन: उत्तरायण ☀️

⏳ आज का चौघड़िया

शुभ कार्य प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त समय चुनें।

☀️ दिन का चौघड़िया

  • अमृत (शुभ) 6:22 AM – 7:52 AM
  • काल (अशुभ) 7:52 AM – 9:22 AM
  • शुभ (उत्तम) 9:22 AM – 10:52 AM
  • रोग (अशुभ) 10:52 AM – 12:23 PM
  • उद्वेग (अशुभ) 12:23 PM – 1:53 PM
  • चर (सामान्य) 1:53 PM – 3:23 PM
  • लाभ (शुभ) 3:23 PM – 4:54 PM
  • अमृत (शुभ) 4:54 PM – 6:24 PM

🌙 रात का चौघड़िया

  • चर (सामान्य) 6:24 PM – 7:54 PM
  • लाभ (शुभ) 7:54 PM – 9:23 PM
  • अमृत (शुभ) 9:23 PM – 10:53 PM
  • काल (अशुभ) 10:53 PM – 12:23 AM
  • शुभ (उत्तम) 12:23 AM – 1:52 AM
  • रोग (अशुभ) 1:52 AM – 3:22 AM
  • उद्वेग (अशुभ) 3:22 AM – 4:52 AM
  • चर (सामान्य) 4:52 AM – 6:22 AM

🌞 सूर्य एवं चंद्र

🌅
सूर्योदय
6:22 AM
🌇
सूर्यास्त
6:24 PM
🌕
चंद्र अवस्था
घटता 🌘
सूर्य राशि
मीन
🌙
चंद्र राशि
मकर
🔢
चंद्र अंशांश (निरयण)
296.33°

⏰ मुहूर्त एवं काल

🚫राहुकाल
7:52 AM – 9:22 AM

इस समय महत्वपूर्ण कार्य न करें।

⚠️यमगण्ड काल
10:52 AM – 12:23 PM

यमगण्ड काल में यात्रा व नए कार्य का प्रारंभ वर्जित।

🌑गुलिक काल
1:53 PM – 3:23 PM

शनि पुत्र गुलिक का काल — शुभ कार्य न करें।

अभिजित मुहूर्त
11:59 AM – 12:47 PM

दिन का सबसे शुभ मुहूर्त — सूर्य मध्याह्न।

ब्रह्म मुहूर्त
4:46 AM – 5:34 AM

ध्यान, पूजा, अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ।

🙏संध्या काल
6:24 PM के आसपास

संध्या वंदन व दीप प्रज्वलन शुभ।

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✨ आज का सुविचार

करुणा को करने से ही आत्मा को आनंद की प्राप्ति होती है।
करुणा का कोई विकल्प नहीं।

आज करुणा में एक कदम आगे बढ़ाएं।

— महाभारत — 16 March 2026 का संदेश

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। — जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते हैं।

— मनुस्मृति ३.५६