🌐 भारत (डिफ़ॉल्ट)
🕉️ हिंदू पंचांग

आज का पंचांग

शनिवार ⚫  |  21 March 2026

विक्रम संवत् 2083  |  शक संवत् 1948  |  माह: मीन / फाल्गुन  |  शुक्ल पक्ष 🌒

🌟 पंचांग के पाँच अंग

🌙
तिथि
तृतीया
शुक्ल पक्ष 🌒 • 3वीं
42% पूर्ण
☀️
वार
शनिवार ⚫
स्वामी: शनि
नक्षत्र
अश्विनी
देवता: अश्विनी कुमार
41% पूर्ण
योग
इंद्र
शुभ योग
🌀
करण
गर
अर्ध तिथि
🧭 आज का दिशा-शूल
दिशा: पूर्व
परिहार (उपाय): अदरक या उड़द दाल खाकर निकलें

आज पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचें। अत्यंत आवश्यक हो तो उपाय करके निकलें।

🍃 ऋतु एवं अयन
दृक् ऋतु: वसंत
वैदिक ऋतु: शिशिर
सूर्य अयन: उत्तरायण ☀️

⏳ आज का चौघड़िया

शुभ कार्य प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त समय चुनें।

☀️ दिन का चौघड़िया

  • काल (अशुभ) 6:17 AM – 7:48 AM
  • शुभ (उत्तम) 7:48 AM – 9:19 AM
  • रोग (अशुभ) 9:19 AM – 10:50 AM
  • उद्वेग (अशुभ) 10:50 AM – 12:21 PM
  • चर (सामान्य) 12:21 PM – 1:52 PM
  • लाभ (शुभ) 1:52 PM – 3:23 PM
  • अमृत (शुभ) 3:23 PM – 4:54 PM
  • काल (अशुभ) 4:54 PM – 6:25 PM

🌙 रात का चौघड़िया

  • लाभ (शुभ) 6:25 PM – 7:54 PM
  • अमृत (शुभ) 7:54 PM – 9:23 PM
  • काल (अशुभ) 9:23 PM – 10:52 PM
  • शुभ (उत्तम) 10:52 PM – 12:21 AM
  • रोग (अशुभ) 12:21 AM – 1:50 AM
  • उद्वेग (अशुभ) 1:50 AM – 3:19 AM
  • चर (सामान्य) 3:19 AM – 4:48 AM
  • लाभ (शुभ) 4:48 AM – 6:17 AM

🌞 सूर्य एवं चंद्र

🌅
सूर्योदय
6:17 AM
🌇
सूर्यास्त
6:25 PM
🌕
चंद्र अवस्था
अमावस्या 🌑
सूर्य राशि
मीन
🌙
चंद्र राशि
मेष
🔢
चंद्र अंशांश (निरयण)
5.42°

⏰ मुहूर्त एवं काल

🚫राहुकाल
9:19 AM – 10:50 AM

इस समय महत्वपूर्ण कार्य न करें।

⚠️यमगण्ड काल
1:52 PM – 3:23 PM

यमगण्ड काल में यात्रा व नए कार्य का प्रारंभ वर्जित।

🌑गुलिक काल
6:17 AM – 7:48 AM

शनि पुत्र गुलिक का काल — शुभ कार्य न करें।

अभिजित मुहूर्त
11:57 AM – 12:45 PM

दिन का सबसे शुभ मुहूर्त — सूर्य मध्याह्न।

ब्रह्म मुहूर्त
4:41 AM – 5:29 AM

ध्यान, पूजा, अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ।

🙏संध्या काल
6:25 PM के आसपास

संध्या वंदन व दीप प्रज्वलन शुभ।

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✨ आज का सुविचार

शांति और भक्ति — यही दो मनुष्य जीवन के पथ हैं।
इन दोनों को साधने वाला सुख को प्राप्त होता है।

आज शांति और भक्ति दोनों पर ध्यान दें।

— पुराण — 21 March 2026 का संदेश

आत्मा वा अरे द्रष्टव्यः श्रोतव्यो मन्तव्यः। — आत्मा को देखना, सुनना और विचार करना ही साधना है।

— बृहदारण्यक उपनिषद्