🌐 भारत (डिफ़ॉल्ट)
🕉️ हिंदू पंचांग

आज का पंचांग

सोमवार 🌙  |  06 April 2026

विक्रम संवत् 2083  |  शक संवत् 1948  |  माह: मीन / फाल्गुन  |  कृष्ण पक्ष 🌘

🌟 पंचांग के पाँच अंग

🌙
तिथि
चतुर्थी
कृष्ण पक्ष 🌘 • 4वीं
90% पूर्ण
☀️
वार
सोमवार 🌙
स्वामी: चंद्र
नक्षत्र
अनुराधा
देवता: मित्र
43% पूर्ण
योग
सिद्धि
शुभ योग
🌀
करण
गर
अर्ध तिथि
🧭 आज का दिशा-शूल
दिशा: पूर्व
परिहार (उपाय): दर्पण देखकर या दूध पीकर निकलें

आज पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचें। अत्यंत आवश्यक हो तो उपाय करके निकलें।

🍃 ऋतु एवं अयन
दृक् ऋतु: वसंत
वैदिक ऋतु: शिशिर
सूर्य अयन: उत्तरायण ☀️

⏳ आज का चौघड़िया

शुभ कार्य प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त समय चुनें।

☀️ दिन का चौघड़िया

  • अमृत (शुभ) 6:03 AM – 7:36 AM
  • काल (अशुभ) 7:36 AM – 9:10 AM
  • शुभ (उत्तम) 9:10 AM – 10:43 AM
  • रोग (अशुभ) 10:43 AM – 12:17 PM
  • उद्वेग (अशुभ) 12:17 PM – 1:50 PM
  • चर (सामान्य) 1:50 PM – 3:23 PM
  • लाभ (शुभ) 3:23 PM – 4:57 PM
  • अमृत (शुभ) 4:57 PM – 6:30 PM

🌙 रात का चौघड़िया

  • चर (सामान्य) 6:30 PM – 7:57 PM
  • लाभ (शुभ) 7:57 PM – 9:23 PM
  • अमृत (शुभ) 9:23 PM – 10:50 PM
  • काल (अशुभ) 10:50 PM – 12:17 AM
  • शुभ (उत्तम) 12:17 AM – 1:43 AM
  • रोग (अशुभ) 1:43 AM – 3:10 AM
  • उद्वेग (अशुभ) 3:10 AM – 4:36 AM
  • चर (सामान्य) 4:36 AM – 6:03 AM

🌞 सूर्य एवं चंद्र

🌅
सूर्योदय
6:03 AM
🌇
सूर्यास्त
6:30 PM
🌕
चंद्र अवस्था
घटता 🌖
सूर्य राशि
मीन
🌙
चंद्र राशि
वृश्चिक
🔢
चंद्र अंशांश (निरयण)
219°

⏰ मुहूर्त एवं काल

🚫राहुकाल
7:36 AM – 9:10 AM

इस समय महत्वपूर्ण कार्य न करें।

⚠️यमगण्ड काल
10:43 AM – 12:17 PM

यमगण्ड काल में यात्रा व नए कार्य का प्रारंभ वर्जित।

🌑गुलिक काल
1:50 PM – 3:23 PM

शनि पुत्र गुलिक का काल — शुभ कार्य न करें।

अभिजित मुहूर्त
11:52 AM – 12:41 PM

दिन का सबसे शुभ मुहूर्त — सूर्य मध्याह्न।

ब्रह्म मुहूर्त
4:31 AM – 5:17 AM

ध्यान, पूजा, अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ।

🙏संध्या काल
6:30 PM के आसपास

संध्या वंदन व दीप प्रज्वलन शुभ।

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✨ आज का सुविचार

प्रेम साधक का दिव्य धर्म है।
इसे पाने वाला साधक कभी दुखी नहीं होता।

आज दिन की शुरुआत प्रेम के संकल्प से करें।

— गीता — 06 April 2026 का संदेश

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। — केवल कर्म करना तुम्हारे अधिकार में है, फल में नहीं।

— श्रीमद्भगवद्गीता २.४७