🌐 भारत (डिफ़ॉल्ट)
🕉️ हिंदू पंचांग

आज का पंचांग

रविवार ☀️  |  12 April 2026

विक्रम संवत् 2083  |  शक संवत् 1948  |  माह: मीन / फाल्गुन  |  कृष्ण पक्ष 🌘

🌟 पंचांग के पाँच अंग

🌙
तिथि
दशमी
कृष्ण पक्ष 🌘 • 10वीं
43% पूर्ण
☀️
वार
रविवार ☀️
स्वामी: सूर्य
नक्षत्र
श्रवण
देवता: विष्णु
85% पूर्ण
योग
साध्य
शुभ योग
🌀
करण
गर
अर्ध तिथि
🧭 आज का दिशा-शूल
दिशा: पश्चिम
परिहार (उपाय): दलिया या घी खाकर निकलें

आज पश्चिम दिशा में यात्रा करने से बचें। अत्यंत आवश्यक हो तो उपाय करके निकलें।

🍃 ऋतु एवं अयन
दृक् ऋतु: वसंत
वैदिक ऋतु: शिशिर
सूर्य अयन: उत्तरायण ☀️

⏳ आज का चौघड़िया

शुभ कार्य प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त समय चुनें।

☀️ दिन का चौघड़िया

  • उद्वेग (अशुभ) 5:58 AM – 7:32 AM
  • चर (सामान्य) 7:32 AM – 9:06 AM
  • लाभ (शुभ) 9:06 AM – 10:41 AM
  • अमृत (शुभ) 10:41 AM – 12:15 PM
  • काल (अशुभ) 12:15 PM – 1:49 PM
  • शुभ (उत्तम) 1:49 PM – 3:23 PM
  • रोग (अशुभ) 3:23 PM – 4:58 PM
  • उद्वेग (अशुभ) 4:58 PM – 6:32 PM

🌙 रात का चौघड़िया

  • शुभ (उत्तम) 6:32 PM – 7:58 PM
  • रोग (अशुभ) 7:58 PM – 9:23 PM
  • उद्वेग (अशुभ) 9:23 PM – 10:49 PM
  • चर (सामान्य) 10:49 PM – 12:15 AM
  • लाभ (शुभ) 12:15 AM – 1:41 AM
  • अमृत (शुभ) 1:41 AM – 3:06 AM
  • काल (अशुभ) 3:06 AM – 4:32 AM
  • शुभ (उत्तम) 4:32 AM – 5:58 AM

🌞 सूर्य एवं चंद्र

🌅
सूर्योदय
5:58 AM
🌇
सूर्यास्त
6:32 PM
🌕
चंद्र अवस्था
अंतिम चतुर्थांश 🌗
सूर्य राशि
मीन
🌙
चंद्र राशि
मकर
🔢
चंद्र अंशांश (निरयण)
291.35°

⏰ मुहूर्त एवं काल

🚫राहुकाल
4:58 PM – 6:32 PM

इस समय महत्वपूर्ण कार्य न करें।

⚠️यमगण्ड काल
12:15 PM – 1:49 PM

यमगण्ड काल में यात्रा व नए कार्य का प्रारंभ वर्जित।

🌑गुलिक काल
3:23 PM – 4:58 PM

शनि पुत्र गुलिक का काल — शुभ कार्य न करें।

अभिजित मुहूर्त
11:50 AM – 12:40 PM

दिन का सबसे शुभ मुहूर्त — सूर्य मध्याह्न।

ब्रह्म मुहूर्त
4:27 AM – 5:12 AM

ध्यान, पूजा, अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ।

🙏संध्या काल
6:32 PM के आसपास

संध्या वंदन व दीप प्रज्वलन शुभ।

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✨ आज का सुविचार

जो विनम्र और कर्म से युक्त है, वह मोक्ष पाता है।

आज कर्म को अपने जीवन में उतारें।

— पुराण — 12 April 2026 का संदेश

मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः। — मन ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण है।

— अमृतबिंदु उपनिषद् २