🌐 भारत (डिफ़ॉल्ट)
🕉️ हिंदू पंचांग

आज का पंचांग

मंगलवार 🔴  |  21 April 2026

विक्रम संवत् 2083  |  शक संवत् 1948  |  माह: मेष / चैत्र  |  शुक्ल पक्ष 🌒

🌟 पंचांग के पाँच अंग

🌙
तिथि
पंचमी
शुक्ल पक्ष 🌒 • 5वीं
34% पूर्ण
☀️
वार
मंगलवार 🔴
स्वामी: मंगल
नक्षत्र
मृगशिरा
देवता: चंद्र
43% पूर्ण
योग
शोभन
शुभ योग
🌀
करण
चतुष्पाद
अर्ध तिथि
🧭 आज का दिशा-शूल
दिशा: उत्तर
परिहार (उपाय): गुड़ खाकर निकलें

आज उत्तर दिशा में यात्रा करने से बचें। अत्यंत आवश्यक हो तो उपाय करके निकलें।

🍃 ऋतु एवं अयन
दृक् ऋतु: वसंत
वैदिक ऋतु: वसंत
सूर्य अयन: उत्तरायण ☀️

⏳ आज का चौघड़िया

शुभ कार्य प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त समय चुनें।

☀️ दिन का चौघड़िया

  • रोग (अशुभ) 5:51 AM – 7:26 AM
  • उद्वेग (अशुभ) 7:26 AM – 9:02 AM
  • चर (सामान्य) 9:02 AM – 10:37 AM
  • लाभ (शुभ) 10:37 AM – 12:13 PM
  • अमृत (शुभ) 12:13 PM – 1:48 PM
  • काल (अशुभ) 1:48 PM – 3:24 PM
  • शुभ (उत्तम) 3:24 PM – 4:59 PM
  • रोग (अशुभ) 4:59 PM – 6:35 PM

🌙 रात का चौघड़िया

  • काल (अशुभ) 6:35 PM – 7:59 PM
  • शुभ (उत्तम) 7:59 PM – 9:24 PM
  • रोग (अशुभ) 9:24 PM – 10:48 PM
  • उद्वेग (अशुभ) 10:48 PM – 12:13 AM
  • चर (सामान्य) 12:13 AM – 1:37 AM
  • लाभ (शुभ) 1:37 AM – 3:02 AM
  • अमृत (शुभ) 3:02 AM – 4:26 AM
  • काल (अशुभ) 4:26 AM – 5:51 AM

🌞 सूर्य एवं चंद्र

🌅
सूर्योदय
5:51 AM
🌇
सूर्यास्त
6:35 PM
🌕
चंद्र अवस्था
वक्र 🌒
सूर्य राशि
मेष
🌙
चंद्र राशि
वृषभ
🔢
चंद्र अंशांश (निरयण)
59.07°

⏰ मुहूर्त एवं काल

🚫राहुकाल
3:24 PM – 4:59 PM

इस समय महत्वपूर्ण कार्य न करें।

⚠️यमगण्ड काल
9:02 AM – 10:37 AM

यमगण्ड काल में यात्रा व नए कार्य का प्रारंभ वर्जित।

🌑गुलिक काल
12:13 PM – 1:48 PM

शनि पुत्र गुलिक का काल — शुभ कार्य न करें।

अभिजित मुहूर्त
11:47 AM – 12:38 PM

दिन का सबसे शुभ मुहूर्त — सूर्य मध्याह्न।

ब्रह्म मुहूर्त
4:21 AM – 5:06 AM

ध्यान, पूजा, अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ।

🙏संध्या काल
6:35 PM के आसपास

संध्या वंदन व दीप प्रज्वलन शुभ।

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✨ आज का सुविचार

धैर्य और विनम्रता — यही दो मनुष्य जीवन के शक्ति हैं।
इन दोनों को साधने वाला मुक्ति को प्राप्त होता है।

आज धैर्य और विनम्रता दोनों पर ध्यान दें।

— महाभारत — 21 April 2026 का संदेश

आत्मा वा अरे द्रष्टव्यः श्रोतव्यो मन्तव्यः। — आत्मा को देखना, सुनना और विचार करना ही साधना है।

— बृहदारण्यक उपनिषद्