रात के 2 बजे हैं। नेटफ्लिक्स चल रहा है और अचानक कुछ मीठा खाने की भयंकर तलब उठती है। हम सब इस स्थिति से गुजर चुके हैं। एक समय था जब ऐसी क्रेविंग के लिए घर के डिब्बे में रखी सूखी बिस्कुट या फ्रिज में हफ्तों से पड़ी बर्फ जमी वैनिला आइसक्रीम ही एकमात्र सहारा हुआ करती थी।
आज कहानी बिलकुल अलग है।
डेजर्ट मार्केट में जो पागलपन अभी चल रहा है, वो हैरान करने वाला है। ब्रांड्स अब सिर्फ मीठा नहीं बेच रहे, वो एक 'एक्सपीरियंस' बेच रहे हैं। आप अपने फोन पर बस कुछ टैप करते हैं और 10 मिनट के अंदर एक डार्क चॉकलेट सी-सॉल्ट कुकी या रसमलाई चीज़केक आपके दरवाजे पर होता है। फूड इंडस्ट्री में 'New Dessert Launches' की बाढ़ आ गई है। नए फ्लेवर्स, अजीबोगरीब कॉम्बिनेशन और हेल्दी ऑप्शन्स ने पूरा गेम बदल दिया है।
आइए सीधे मुद्दे पर आते हैं और देखते हैं कि कुकीज़, आइसक्रीम और देसी मिठाइयों के मार्केट में असल में चल क्या रहा है।
कुकीज़: अब सिर्फ चाय में डुबोने वाली बिस्कुट नहीं
सच कहूं तो अब कोई भी सूखी और बेस्वाद कुकी नहीं खाना चाहता। लोगों को अब वो कुकीज़ चाहिए जो दिखने में इंस्टाग्राम लायक हों और खाने में सीधे दिमाग के हैप्पी हॉर्मोन्स को हिट करें।
'न्यूयॉर्क स्टाइल' चंकी और सेंटर-फिल्ड कुकीज़
पतली कुकीज़ का ट्रेंड खत्म हो रहा है। उनकी जगह ले ली है 100 से 150 ग्राम वजन वाली भारी-भरकम 'न्यूयॉर्क स्टाइल' कुकीज़ ने।
- टेक्सचर गेम: बाहर से हल्की क्रिस्पी और अंदर से एकदम सॉफ्ट और 'गूई' (gooey)।
- सेंटर-फिल्ड सरप्राइज: आप कुकी को बीच से तोड़ते हैं और अंदर से पिघली हुई न्यूटेला, बिस्कॉफ स्प्रेड या बेल्जियन चॉकलेट लावा की तरह बाहर आती है।
आजकल कई D2C (डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर) बेकरी ब्रांड्स सिर्फ इन्ही चंकी कुकीज़ पर अपना पूरा बिजनेस चला रहे हैं। इन्हें खाने से पहले 10 सेकंड माइक्रोवेव करने का चलन है, जिससे अंदर की चॉकलेट पूरी तरह पिघल जाए। यह सिर्फ एक स्नैक नहीं, बल्कि अपने आप में एक पूरा डेजर्ट बन चुका है।
मिलेट्स, रागी और 'गिल्ट-फ्री' स्नैकिंग
मीठा खाना है, लेकिन वजन भी नहीं बढ़ाना। ये आज के समय की सबसे बड़ी समस्या है। ब्रांड्स ने इसे पकड़ लिया है। मार्केट में अब ऐसी कुकीज़ की भरमार है जिनमें मैदा और रिफाइंड चीनी का इस्तेमाल जीरो है। रागी, ओट्स, ज्वार और बादाम के आटे से बनी कुकीज़ अब बोरिंग नहीं रहीं। मीठेपन के लिए खजूर का सिरप, स्टीविया या कोकोनट शुगर का इस्तेमाल हो रहा है। सबसे अच्छी बात यह है कि स्वाद से कोई समझौता नहीं किया जा रहा। एक अच्छी ओट्स और डार्क चॉकलेट कुकी खाकर आपको पता भी नहीं चलेगा कि इसमें मैदा नहीं है।

आइसक्रीम: वैनिला और स्ट्रॉबेरी के बोरिंग दौर का अंत
एक जमाना था जब आइसक्रीम का मतलब बटरस्कॉच या चॉकलेट हुआ करता था। लेकिन आज अगर आप किसी प्रीमियम आइसक्रीम पार्लर या क्विक-कॉमर्स ऐप पर जाएंगे, तो फ्लेवर्स देखकर आपका सिर चकरा जाएगा।
तीखे और नमकीन फ्लेवर्स (Savory & Spicy Ice Creams)
क्या आपने कभी लाल मिर्च वाली आइसक्रीम खाई है? सुनने में अजीब लगता है, लेकिन 'चिली गवावा' (अमरूद और लाल मिर्च) इस वक्त भारत के सबसे ज्यादा बिकने वाले नए फ्लेवर्स में से एक है। बचपन में स्कूल के बाहर जो अमरूद पर नमक-मिर्च लगाकर खाने का मजा था, आइसक्रीम ब्रांड्स ने ठीक उसी याद को एक स्कूप में पैक कर दिया है। इसके अलावा आम पन्ना, जलजीरा और यहां तक कि 'पानी पुरी' फ्लेवर की सोर्बे (Sorbet) भी मार्केट में आ चुकी हैं। यह तीखे, खट्टे और मीठे का ऐसा ब्लास्ट है जो सीधे आपके टेस्ट बड्स को झकझोर देता है।
वीगन (Vegan), हाई-प्रोटीन और प्लांट-बेस्ड मैजिक
दूध से एलर्जी है? या वीगन डाइट पर हैं? कोई बात नहीं। प्लांट-बेस्ड आइसक्रीम अब एक बहुत बड़ा मार्केट बन चुकी है। ओट मिल्क, बादाम का दूध और कोकोनट मिल्क से बनी आइसक्रीम्स धड़ल्ले से लॉन्च हो रही हैं। और हां, ये बर्फ जैसी नहीं लगतीं। इनमें भी डेयरी आइसक्रीम जैसी ही क्रीमीनेस होती है। इसके साथ ही 'हाई-प्रोटीन' और 'जीरो-शुगर' आइसक्रीम के टब्स उन लोगों की पहली पसंद बन रहे हैं जो जिम जाते हैं लेकिन रात में आइसक्रीम खाने की आदत छोड़ नहीं पाते। एक पूरे टब में सिर्फ 300 कैलोरी और 15 ग्राम प्रोटीन! ये फिटनेस और क्रेविंग दोनों का परफेक्ट जुगाड़ है।

फ्यूजन मिठाइयां: देसी स्वाद, विदेशी स्वैग
त्योहारों पर काजू कतली और रसगुल्ले के डिब्बे पास करते-करते लोग थक चुके हैं। हमारी पारंपरिक भारतीय मिठाइयां बहुत स्वादिष्ट हैं, लेकिन नई पीढ़ी को कुछ नया चाहिए था। यहीं से जन्म हुआ 'फ्यूजन स्वीट्स' का।
यह देसी मिठाइयों और वेस्टर्न डेजर्ट्स का ऐसा क्रॉसओवर है जिसके बारे में कुछ साल पहले किसी ने सोचा भी नहीं था।
चीज़केक और देसी मिठाइयों का बेजोड़ संगम
गुलाब जामुन चीज़केक। यह नाम आपने हाल ही में बहुत सी शादियों या प्रीमियम कैफे के मेन्यू में देखा होगा। नीचे बिस्कुट का क्रंची बेस, बीच में क्रीम चीज़ की स्मूथ लेयर और उसके ठीक ऊपर चाशनी में डूबे असली देसी गुलाब जामुन के टुकड़े। यह खाने में जितना भारी है, स्वाद में उतना ही गजब है। इसी तरह:
- रसमलाई त्रेस लेचेस (Tres Leches): मैक्सिकन स्पंज केक जिसे आम दूध की जगह रसमलाई के गाढ़े, केसरिया दूध में भिगोया जाता है।
- मोतीचूर रबरी पार्फे (Parfait): ग्लास में मोतीचूर के लड्डू, गाढ़ी रबड़ी और पिस्ता की लेयर्स।
- रसगुल्ला मैकरॉन: फ्रेंच मैकरॉन जिसके अंदर फिलिंग के तौर पर रसगुल्ले का इस्तेमाल होता है।
बकलावा (Baklava) का इंडियन वर्जन
मिडिल-ईस्ट की मशहूर मिठाई बकलावा ने इंडियन मार्केट में बहुत तेजी से अपनी जगह बनाई है। लेकिन ब्रांड्स ने इसे भी 'देसी' टच दे दिया है। अब आपको गजरैला (गाजर का हलवा) बकलावा या अंजीर-खजूर बकलावा आसानी से मिल जाएगा। फिलो पेस्ट्री की क्रिस्पी लेयर्स के अंदर भारतीय हलवे की स्टफिंग एक एकदम नया और क्रंची एक्सपीरियंस देती है। पैकेजिंग इतनी प्रीमियम होती है कि ये दिवाली या किसी भी बड़े मौके पर गिफ्ट करने का सबसे बेहतरीन ऑप्शन बन चुके हैं।

10-मिनट डिलीवरी का डेजर्ट मार्केट पर असर
हम उन चीजों के बारे में बात किए बिना नए डेजर्ट लॉन्च की बात नहीं कर सकते, जिन्होंने इन्हें हम तक पहुँचाया है - क्विक कॉमर्स ऐप्स।
ज़ेप्टो, ब्लिंकिट और स्विगी इंस्टामार्ट ने कंज्यूमर का बिहेवियर पूरी तरह से बदल दिया है। पहले आप मीठा खाने के लिए किसी बेकरी तक जाते थे या जोमैटो पर ऑर्डर करके 45 मिनट इंतजार करते थे। अब, क्रेविंग उठी और ठीक 10 मिनट बाद एक प्रीमियम तिरामिसू या बेल्जियन चोको-लावा केक आपके हाथ में होता है।
ब्रांड्स अब अपने डेजर्ट्स की पैकेजिंग ही इस तरह से डिज़ाइन कर रहे हैं कि वो इन डार्क स्टोर्स के फ्रीजर में हफ्तों तक फ्रेश रह सकें और बाइक पर डिलीवरी के दौरान खराब न हों। छोटे, सिंगल-सर्विंग (Single-serving) टब्स और जार केक्स का ट्रेंड इसी वजह से आसमान छू रहा है। लोगों को पूरा केक नहीं चाहिए, उन्हें बस अभी की क्रेविंग मिटाने के लिए एक छोटा सा जार चाहिए।
सी-सॉल्ट (Sea Salt) और डार्क चॉकलेट: हर डेजर्ट की नई जान
अगर आप आजकल लॉन्च होने वाले नए डेजर्ट्स के नाम ध्यान से पढ़ें, तो आपको हर दूसरी चीज़ में 'सी-सॉल्ट' (समुद्री नमक) लिखा मिलेगा। सी-सॉल्ट कुकीज़, सी-सॉल्ट कैरेमल आइसक्रीम, सी-सॉल्ट डार्क चॉकलेट बार्क।
आखिर मीठे में नमक क्यों?
यह कोई अजीब प्रयोग नहीं है, बल्कि शुद्ध साइंस है। नमक आपके टेस्ट बड्स को एक्टिवेट करता है। जब डार्क चॉकलेट की कड़वाहट और कैरेमल की अत्यधिक मिठास के साथ सी-सॉल्ट के मोटे दाने जीभ पर पड़ते हैं, तो यह मिठास को और ज्यादा निखार देता है। नमक उस भारीपन को काटता है जो अक्सर ज्यादा मीठा खाने पर महसूस होता है।
डार्क चॉकलेट (70% या उससे अधिक कोको) अपने आप में एक प्रीमियम फील देती है। यह मिल्क चॉकलेट की तरह गले में नहीं लगती। जब डार्क चॉकलेट के रिच, कोको फ्लेवर को सी-सॉल्ट के साथ पेयर किया जाता है, तो साधारण सी कुकी या आइसक्रीम का स्वाद भी किसी फाइव-स्टार रेस्टोरेंट के डेजर्ट जैसा लगने लगता है। यह कॉम्बिनेशन इतना हिट है कि छोटे लोकल बेकर्स से लेकर बड़े मल्टीनेशनल ब्रांड्स तक, हर कोई अपने मेन्यू में कम से कम एक 'डार्क चॉकलेट और सी-सॉल्ट' आइटम जरूर रख रहा है।



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