🌐 भारत (डिफ़ॉल्ट)
🕉️ हिंदू पंचांग

आज का पंचांग

शुक्रवार ⚪  |  13 February 2026

विक्रम संवत् 2083  |  शक संवत् 1948  |  माह: कुम्भ / माघ  |  कृष्ण पक्ष 🌘

🌟 पंचांग के पाँच अंग

🌙
तिथि
एकादशी
कृष्ण पक्ष 🌘 • 11वीं
89% पूर्ण
☀️
वार
शुक्रवार ⚪
स्वामी: शुक्र
नक्षत्र
मूल
देवता: निर्ऋति
82% पूर्ण
⚠️
योग
वज्र
अशुभ योग
🌀
करण
शकुनि
अर्ध तिथि
🚩 विशेष: 🌸 आज एकादशी है - भगवान विष्णु की आराधना करें।
🧭 आज का दिशा-शूल
दिशा: पश्चिम
परिहार (उपाय): राई या जौ खाकर निकलें

आज पश्चिम दिशा में यात्रा करने से बचें। अत्यंत आवश्यक हो तो उपाय करके निकलें।

🍃 ऋतु एवं अयन
दृक् ऋतु: शिशिर
वैदिक ऋतु: शिशिर
सूर्य अयन: उत्तरायण ☀️

⏳ आज का चौघड़िया

शुभ कार्य प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त समय चुनें।

☀️ दिन का चौघड़िया

  • चर (सामान्य) 6:45 AM – 8:11 AM
  • लाभ (शुभ) 8:11 AM – 9:37 AM
  • अमृत (शुभ) 9:37 AM – 11:03 AM
  • काल (अशुभ) 11:03 AM – 12:28 PM
  • शुभ (उत्तम) 12:28 PM – 1:54 PM
  • रोग (अशुभ) 1:54 PM – 3:20 PM
  • उद्वेग (अशुभ) 3:20 PM – 4:46 PM
  • चर (सामान्य) 4:46 PM – 6:12 PM

🌙 रात का चौघड़िया

  • रोग (अशुभ) 6:12 PM – 7:46 PM
  • उद्वेग (अशुभ) 7:46 PM – 9:20 PM
  • चर (सामान्य) 9:20 PM – 10:54 PM
  • लाभ (शुभ) 10:54 PM – 12:28 AM
  • अमृत (शुभ) 12:28 AM – 2:03 AM
  • काल (अशुभ) 2:03 AM – 3:37 AM
  • शुभ (उत्तम) 3:37 AM – 5:11 AM
  • रोग (अशुभ) 5:11 AM – 6:45 AM

🌞 सूर्य एवं चंद्र

🌅
सूर्योदय
6:45 AM
🌇
सूर्यास्त
6:12 PM
🌕
चंद्र अवस्था
अंतिम चतुर्थांश 🌗
सूर्य राशि
कुम्भ
🌙
चंद्र राशि
धनु
🔢
चंद्र अंशांश (निरयण)
250.95°

⏰ मुहूर्त एवं काल

🚫राहुकाल
11:03 AM – 12:28 PM

इस समय महत्वपूर्ण कार्य न करें।

⚠️यमगण्ड काल
3:20 PM – 4:46 PM

यमगण्ड काल में यात्रा व नए कार्य का प्रारंभ वर्जित।

🌑गुलिक काल
8:11 AM – 9:37 AM

शनि पुत्र गुलिक का काल — शुभ कार्य न करें।

अभिजित मुहूर्त
12:05 PM – 12:51 PM

दिन का सबसे शुभ मुहूर्त — सूर्य मध्याह्न।

ब्रह्म मुहूर्त
5:05 AM – 5:55 AM

ध्यान, पूजा, अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ।

🙏संध्या काल
6:12 PM के आसपास

संध्या वंदन व दीप प्रज्वलन शुभ।

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✨ आज का सुविचार

शांति को अपनाने से ही मनुष्य को आनंद की प्राप्ति होती है।
शांति का कोई विकल्प नहीं।

आज शांति में एक कदम आगे बढ़ाएं।

— ऋग्वेद — 13 February 2026 का संदेश

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। — जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते हैं।

— मनुस्मृति ३.५६