🌐 भारत (डिफ़ॉल्ट)
🕉️ हिंदू पंचांग

आज का पंचांग

शनिवार ⚫  |  14 February 2026

विक्रम संवत् 2083  |  शक संवत् 1948  |  माह: कुम्भ / माघ  |  कृष्ण पक्ष 🌘

🌟 पंचांग के पाँच अंग

🌙
तिथि
द्वादशी
कृष्ण पक्ष 🌘 • 12वीं
82% पूर्ण
☀️
वार
शनिवार ⚫
स्वामी: शनि
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा
देवता: आपः
74% पूर्ण
योग
सिद्धि
शुभ योग
🌀
करण
नाग
अर्ध तिथि
🧭 आज का दिशा-शूल
दिशा: पूर्व
परिहार (उपाय): अदरक या उड़द दाल खाकर निकलें

आज पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचें। अत्यंत आवश्यक हो तो उपाय करके निकलें।

🍃 ऋतु एवं अयन
दृक् ऋतु: शिशिर
वैदिक ऋतु: शिशिर
सूर्य अयन: उत्तरायण ☀️

⏳ आज का चौघड़िया

शुभ कार्य प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त समय चुनें।

☀️ दिन का चौघड़िया

  • काल (अशुभ) 6:44 AM – 8:10 AM
  • शुभ (उत्तम) 8:10 AM – 9:36 AM
  • रोग (अशुभ) 9:36 AM – 11:02 AM
  • उद्वेग (अशुभ) 11:02 AM – 12:28 PM
  • चर (सामान्य) 12:28 PM – 1:54 PM
  • लाभ (शुभ) 1:54 PM – 3:20 PM
  • अमृत (शुभ) 3:20 PM – 4:46 PM
  • काल (अशुभ) 4:46 PM – 6:12 PM

🌙 रात का चौघड़िया

  • लाभ (शुभ) 6:12 PM – 7:46 PM
  • अमृत (शुभ) 7:46 PM – 9:20 PM
  • काल (अशुभ) 9:20 PM – 10:54 PM
  • शुभ (उत्तम) 10:54 PM – 12:28 AM
  • रोग (अशुभ) 12:28 AM – 2:02 AM
  • उद्वेग (अशुभ) 2:02 AM – 3:36 AM
  • चर (सामान्य) 3:36 AM – 5:10 AM
  • लाभ (शुभ) 5:10 AM – 6:44 AM

🌞 सूर्य एवं चंद्र

🌅
सूर्योदय
6:44 AM
🌇
सूर्यास्त
6:12 PM
🌕
चंद्र अवस्था
घटता 🌘
सूर्य राशि
कुम्भ
🌙
चंद्र राशि
धनु
🔢
चंद्र अंशांश (निरयण)
263.18°

⏰ मुहूर्त एवं काल

🚫राहुकाल
9:36 AM – 11:02 AM

इस समय महत्वपूर्ण कार्य न करें।

⚠️यमगण्ड काल
1:54 PM – 3:20 PM

यमगण्ड काल में यात्रा व नए कार्य का प्रारंभ वर्जित।

🌑गुलिक काल
6:44 AM – 8:10 AM

शनि पुत्र गुलिक का काल — शुभ कार्य न करें।

अभिजित मुहूर्त
12:05 PM – 12:51 PM

दिन का सबसे शुभ मुहूर्त — सूर्य मध्याह्न।

ब्रह्म मुहूर्त
5:04 AM – 5:54 AM

ध्यान, पूजा, अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ।

🙏संध्या काल
6:12 PM के आसपास

संध्या वंदन व दीप प्रज्वलन शुभ।

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✨ आज का सुविचार

विनम्रता और सेवा — यही दो मनुष्य जीवन के पथ हैं।
इन दोनों को साधने वाला ज्ञान को प्राप्त होता है।

आज विनम्रता और सेवा दोनों पर ध्यान दें।

— वेद — 14 February 2026 का संदेश

परोपकाराय सतां विभूतयः। — सज्जनों की संपत्ति दूसरों के उपकार के लिए होती है।

— भर्तृहरि नीतिशतक