🌐 भारत (डिफ़ॉल्ट)
🕉️ हिंदू पंचांग

आज का पंचांग

बुधवार 💚  |  11 March 2026

विक्रम संवत् 2083  |  शक संवत् 1948  |  माह: कुम्भ / माघ  |  कृष्ण पक्ष 🌘

🌟 पंचांग के पाँच अंग

🌙
तिथि
अष्टमी
कृष्ण पक्ष 🌘 • 8वीं
36% पूर्ण
☀️
वार
बुधवार 💚
स्वामी: बुध
नक्षत्र
ज्येष्ठा
देवता: इंद्र
61% पूर्ण
योग
सिद्धि
शुभ योग
🌀
करण
बव
अर्ध तिथि
🧭 आज का दिशा-शूल
दिशा: उत्तर
परिहार (उपाय): धनिया या तिल खाकर निकलें

आज उत्तर दिशा में यात्रा करने से बचें। अत्यंत आवश्यक हो तो उपाय करके निकलें।

🍃 ऋतु एवं अयन
दृक् ऋतु: वसंत
वैदिक ऋतु: शिशिर
सूर्य अयन: उत्तरायण ☀️

⏳ आज का चौघड़िया

शुभ कार्य प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त समय चुनें।

☀️ दिन का चौघड़िया

  • लाभ (शुभ) 6:26 AM – 7:56 AM
  • अमृत (शुभ) 7:56 AM – 9:25 AM
  • काल (अशुभ) 9:25 AM – 10:55 AM
  • शुभ (उत्तम) 10:55 AM – 12:24 PM
  • रोग (अशुभ) 12:24 PM – 1:54 PM
  • उद्वेग (अशुभ) 1:54 PM – 3:23 PM
  • चर (सामान्य) 3:23 PM – 4:53 PM
  • लाभ (शुभ) 4:53 PM – 6:22 PM

🌙 रात का चौघड़िया

  • उद्वेग (अशुभ) 6:22 PM – 7:53 PM
  • चर (सामान्य) 7:53 PM – 9:23 PM
  • लाभ (शुभ) 9:23 PM – 10:54 PM
  • अमृत (शुभ) 10:54 PM – 12:24 AM
  • काल (अशुभ) 12:24 AM – 1:55 AM
  • शुभ (उत्तम) 1:55 AM – 3:25 AM
  • रोग (अशुभ) 3:25 AM – 4:56 AM
  • उद्वेग (अशुभ) 4:56 AM – 6:26 AM

🌞 सूर्य एवं चंद्र

🌅
सूर्योदय
6:26 AM
🌇
सूर्यास्त
6:22 PM
🌕
चंद्र अवस्था
घटता 🌖
सूर्य राशि
कुम्भ
🌙
चंद्र राशि
वृश्चिक
🔢
चंद्र अंशांश (निरयण)
234.79°

⏰ मुहूर्त एवं काल

🚫राहुकाल
12:24 PM – 1:54 PM

इस समय महत्वपूर्ण कार्य न करें।

⚠️यमगण्ड काल
7:56 AM – 9:25 AM

यमगण्ड काल में यात्रा व नए कार्य का प्रारंभ वर्जित।

🌑गुलिक काल
10:55 AM – 12:24 PM

शनि पुत्र गुलिक का काल — शुभ कार्य न करें।

अभिजित मुहूर्त
बुधवार — अभिजित निषिद्ध है (ज्योतिष परंपरा)

दिन का सबसे शुभ मुहूर्त — सूर्य मध्याह्न।

ब्रह्म मुहूर्त
4:49 AM – 5:38 AM

ध्यान, पूजा, अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ।

🙏संध्या काल
6:22 PM के आसपास

संध्या वंदन व दीप प्रज्वलन शुभ।

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✨ आज का सुविचार

प्रेम ही आनंद का साधना है।
जो प्रेम को जानता है, वह सब कुछ जानता है।

आज का दिन प्रेम की साधना को समर्पित करें।

— भर्तृहरि — 11 March 2026 का संदेश

विद्या विनयेन शोभते। — विद्या विनम्रता से ही शोभती है।

— चाणक्य नीति