🌐 भारत (डिफ़ॉल्ट)
🕉️ हिंदू पंचांग

आज का पंचांग

गुरुवार 🟡  |  12 March 2026

विक्रम संवत् 2083  |  शक संवत् 1948  |  माह: कुम्भ / माघ  |  कृष्ण पक्ष 🌘

🌟 पंचांग के पाँच अंग

🌙
तिथि
नवमी
कृष्ण पक्ष 🌘 • 9वीं
27% पूर्ण
☀️
वार
गुरुवार 🟡
स्वामी: बृहस्पति
नक्षत्र
मूल
देवता: निर्ऋति
50% पूर्ण
⚠️
योग
व्यतीपात
अशुभ योग
🌀
करण
कौलव
अर्ध तिथि
🧭 आज का दिशा-शूल
दिशा: दक्षिण
परिहार (उपाय): दही या जीरा खाकर निकलें

आज दक्षिण दिशा में यात्रा करने से बचें। अत्यंत आवश्यक हो तो उपाय करके निकलें।

🍃 ऋतु एवं अयन
दृक् ऋतु: वसंत
वैदिक ऋतु: शिशिर
सूर्य अयन: उत्तरायण ☀️

⏳ आज का चौघड़िया

शुभ कार्य प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त समय चुनें।

☀️ दिन का चौघड़िया

  • शुभ (उत्तम) 6:25 AM – 7:55 AM
  • रोग (अशुभ) 7:55 AM – 9:24 AM
  • उद्वेग (अशुभ) 9:24 AM – 10:54 AM
  • चर (सामान्य) 10:54 AM – 12:24 PM
  • लाभ (शुभ) 12:24 PM – 1:54 PM
  • अमृत (शुभ) 1:54 PM – 3:23 PM
  • काल (अशुभ) 3:23 PM – 4:53 PM
  • शुभ (उत्तम) 4:53 PM – 6:23 PM

🌙 रात का चौघड़िया

  • अमृत (शुभ) 6:23 PM – 7:53 PM
  • काल (अशुभ) 7:53 PM – 9:23 PM
  • शुभ (उत्तम) 9:23 PM – 10:54 PM
  • रोग (अशुभ) 10:54 PM – 12:24 AM
  • उद्वेग (अशुभ) 12:24 AM – 1:54 AM
  • चर (सामान्य) 1:54 AM – 3:24 AM
  • लाभ (शुभ) 3:24 AM – 4:55 AM
  • अमृत (शुभ) 4:55 AM – 6:25 AM

🌞 सूर्य एवं चंद्र

🌅
सूर्योदय
6:25 AM
🌇
सूर्यास्त
6:23 PM
🌕
चंद्र अवस्था
अंतिम चतुर्थांश 🌗
सूर्य राशि
कुम्भ
🌙
चंद्र राशि
धनु
🔢
चंद्र अंशांश (निरयण)
246.71°

⏰ मुहूर्त एवं काल

🚫राहुकाल
1:54 PM – 3:23 PM

इस समय महत्वपूर्ण कार्य न करें।

⚠️यमगण्ड काल
6:25 AM – 7:55 AM

यमगण्ड काल में यात्रा व नए कार्य का प्रारंभ वर्जित।

🌑गुलिक काल
9:24 AM – 10:54 AM

शनि पुत्र गुलिक का काल — शुभ कार्य न करें।

अभिजित मुहूर्त
12:00 PM – 12:48 PM

दिन का सबसे शुभ मुहूर्त — सूर्य मध्याह्न।

ब्रह्म मुहूर्त
4:49 AM – 5:37 AM

ध्यान, पूजा, अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ।

🙏संध्या काल
6:23 PM के आसपास

संध्या वंदन व दीप प्रज्वलन शुभ।

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✨ आज का सुविचार

करुणा व्यक्ति का श्रेष्ठ धर्म है।
इसे पाने वाला व्यक्ति कभी दुखी नहीं होता।

आज दिन की शुरुआत करुणा के संकल्प से करें।

— भर्तृहरि — 12 March 2026 का संदेश

मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः। — मन ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण है।

— अमृतबिंदु उपनिषद् २