🌐 भारत (डिफ़ॉल्ट)
🕉️ हिंदू पंचांग

आज का पंचांग

शुक्रवार ⚪  |  13 March 2026

विक्रम संवत् 2083  |  शक संवत् 1948  |  माह: कुम्भ / माघ  |  कृष्ण पक्ष 🌘

🌟 पंचांग के पाँच अंग

🌙
तिथि
दशमी
कृष्ण पक्ष 🌘 • 10वीं
19% पूर्ण
☀️
वार
शुक्रवार ⚪
स्वामी: शुक्र
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा
देवता: आपः
41% पूर्ण
योग
वरीयान
शुभ योग
🌀
करण
गर
अर्ध तिथि
🧭 आज का दिशा-शूल
दिशा: पश्चिम
परिहार (उपाय): राई या जौ खाकर निकलें

आज पश्चिम दिशा में यात्रा करने से बचें। अत्यंत आवश्यक हो तो उपाय करके निकलें।

🍃 ऋतु एवं अयन
दृक् ऋतु: वसंत
वैदिक ऋतु: शिशिर
सूर्य अयन: उत्तरायण ☀️

⏳ आज का चौघड़िया

शुभ कार्य प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त समय चुनें।

☀️ दिन का चौघड़िया

  • चर (सामान्य) 6:24 AM – 7:54 AM
  • लाभ (शुभ) 7:54 AM – 9:24 AM
  • अमृत (शुभ) 9:24 AM – 10:54 AM
  • काल (अशुभ) 10:54 AM – 12:24 PM
  • शुभ (उत्तम) 12:24 PM – 1:53 PM
  • रोग (अशुभ) 1:53 PM – 3:23 PM
  • उद्वेग (अशुभ) 3:23 PM – 4:53 PM
  • चर (सामान्य) 4:53 PM – 6:23 PM

🌙 रात का चौघड़िया

  • रोग (अशुभ) 6:23 PM – 7:53 PM
  • उद्वेग (अशुभ) 7:53 PM – 9:23 PM
  • चर (सामान्य) 9:23 PM – 10:53 PM
  • लाभ (शुभ) 10:53 PM – 12:24 AM
  • अमृत (शुभ) 12:24 AM – 1:54 AM
  • काल (अशुभ) 1:54 AM – 3:24 AM
  • शुभ (उत्तम) 3:24 AM – 4:54 AM
  • रोग (अशुभ) 4:54 AM – 6:24 AM

🌞 सूर्य एवं चंद्र

🌅
सूर्योदय
6:24 AM
🌇
सूर्यास्त
6:23 PM
🌕
चंद्र अवस्था
अंतिम चतुर्थांश 🌗
सूर्य राशि
कुम्भ
🌙
चंद्र राशि
धनु
🔢
चंद्र अंशांश (निरयण)
258.76°

⏰ मुहूर्त एवं काल

🚫राहुकाल
10:54 AM – 12:24 PM

इस समय महत्वपूर्ण कार्य न करें।

⚠️यमगण्ड काल
3:23 PM – 4:53 PM

यमगण्ड काल में यात्रा व नए कार्य का प्रारंभ वर्जित।

🌑गुलिक काल
7:54 AM – 9:24 AM

शनि पुत्र गुलिक का काल — शुभ कार्य न करें।

अभिजित मुहूर्त
12:00 PM – 12:48 PM

दिन का सबसे शुभ मुहूर्त — सूर्य मध्याह्न।

ब्रह्म मुहूर्त
4:48 AM – 5:36 AM

ध्यान, पूजा, अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ।

🙏संध्या काल
6:23 PM के आसपास

संध्या वंदन व दीप प्रज्वलन शुभ।

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✨ आज का सुविचार

सत्य ही मुक्ति का मार्ग है।
जो सत्य को जानता है, वह सब कुछ जानता है।

आज का दिन सत्य की साधना को समर्पित करें।

— भर्तृहरि — 13 March 2026 का संदेश

योगः कर्मसु कौशलम्। — योग कर्मों में कुशलता है।

— श्रीमद्भगवद्गीता २.५०