🌐 भारत (डिफ़ॉल्ट)
🕉️ हिंदू पंचांग

आज का पंचांग

गुरुवार 🟡  |  02 April 2026

विक्रम संवत् 2083  |  शक संवत् 1948  |  माह: मीन / फाल्गुन  |  कृष्ण पक्ष 🌘

🌟 पंचांग के पाँच अंग

🌙
तिथि
प्रतिपदा
कृष्ण पक्ष 🌘 • 1वीं
15% पूर्ण
☀️
वार
गुरुवार 🟡
स्वामी: बृहस्पति
नक्षत्र
हस्त
देवता: सूर्य
76% पूर्ण
योग
ध्रुव
शुभ योग
🌀
करण
चतुष्पाद
अर्ध तिथि
🧭 आज का दिशा-शूल
दिशा: दक्षिण
परिहार (उपाय): दही या जीरा खाकर निकलें

आज दक्षिण दिशा में यात्रा करने से बचें। अत्यंत आवश्यक हो तो उपाय करके निकलें।

🍃 ऋतु एवं अयन
दृक् ऋतु: वसंत
वैदिक ऋतु: शिशिर
सूर्य अयन: उत्तरायण ☀️

⏳ आज का चौघड़िया

शुभ कार्य प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त समय चुनें।

☀️ दिन का चौघड़िया

  • शुभ (उत्तम) 6:07 AM – 7:39 AM
  • रोग (अशुभ) 7:39 AM – 9:12 AM
  • उद्वेग (अशुभ) 9:12 AM – 10:45 AM
  • चर (सामान्य) 10:45 AM – 12:18 PM
  • लाभ (शुभ) 12:18 PM – 1:50 PM
  • अमृत (शुभ) 1:50 PM – 3:23 PM
  • काल (अशुभ) 3:23 PM – 4:56 PM
  • शुभ (उत्तम) 4:56 PM – 6:29 PM

🌙 रात का चौघड़िया

  • अमृत (शुभ) 6:29 PM – 7:56 PM
  • काल (अशुभ) 7:56 PM – 9:23 PM
  • शुभ (उत्तम) 9:23 PM – 10:50 PM
  • रोग (अशुभ) 10:50 PM – 12:18 AM
  • उद्वेग (अशुभ) 12:18 AM – 1:45 AM
  • चर (सामान्य) 1:45 AM – 3:12 AM
  • लाभ (शुभ) 3:12 AM – 4:39 AM
  • अमृत (शुभ) 4:39 AM – 6:07 AM

🌞 सूर्य एवं चंद्र

🌅
सूर्योदय
6:07 AM
🌇
सूर्यास्त
6:29 PM
🌕
चंद्र अवस्था
पूर्णिमा 🌕
सूर्य राशि
मीन
🌙
चंद्र राशि
कन्या
🔢
चंद्र अंशांश (निरयण)
170.11°

⏰ मुहूर्त एवं काल

🚫राहुकाल
1:50 PM – 3:23 PM

इस समय महत्वपूर्ण कार्य न करें।

⚠️यमगण्ड काल
6:07 AM – 7:39 AM

यमगण्ड काल में यात्रा व नए कार्य का प्रारंभ वर्जित।

🌑गुलिक काल
9:12 AM – 10:45 AM

शनि पुत्र गुलिक का काल — शुभ कार्य न करें।

अभिजित मुहूर्त
11:53 AM – 12:42 PM

दिन का सबसे शुभ मुहूर्त — सूर्य मध्याह्न।

ब्रह्म मुहूर्त
4:33 AM – 5:20 AM

ध्यान, पूजा, अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ।

🙏संध्या काल
6:29 PM के आसपास

संध्या वंदन व दीप प्रज्वलन शुभ।

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✨ आज का सुविचार

शांति के पथ पर प्रतिदिन चलने वाला विजयी होता है।
सफलता केवल शांति से ही प्राप्त होती है।

प्रतिदिन शांति का अभ्यास करें।

— भर्तृहरि — 02 April 2026 का संदेश

अहं ब्रह्मास्मि। — मैं ब्रह्म हूँ।

— बृहदारण्यक उपनिषद् १.४.१०