🌐 भारत (डिफ़ॉल्ट)
🕉️ हिंदू पंचांग

आज का पंचांग

शुक्रवार ⚪  |  03 April 2026

विक्रम संवत् 2083  |  शक संवत् 1948  |  माह: मीन / फाल्गुन  |  कृष्ण पक्ष 🌘

🌟 पंचांग के पाँच अंग

🌙
तिथि
द्वितीया
कृष्ण पक्ष 🌘 • 2वीं
11% पूर्ण
☀️
वार
शुक्रवार ⚪
स्वामी: शुक्र
नक्षत्र
चित्रा
देवता: त्वष्टा
69% पूर्ण
⚠️
योग
व्याघात
अशुभ योग
🌀
करण
किंस्तुघ्न
अर्ध तिथि
🧭 आज का दिशा-शूल
दिशा: पश्चिम
परिहार (उपाय): राई या जौ खाकर निकलें

आज पश्चिम दिशा में यात्रा करने से बचें। अत्यंत आवश्यक हो तो उपाय करके निकलें।

🍃 ऋतु एवं अयन
दृक् ऋतु: वसंत
वैदिक ऋतु: शिशिर
सूर्य अयन: उत्तरायण ☀️

⏳ आज का चौघड़िया

शुभ कार्य प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त समय चुनें।

☀️ दिन का चौघड़िया

  • चर (सामान्य) 6:06 AM – 7:39 AM
  • लाभ (शुभ) 7:39 AM – 9:12 AM
  • अमृत (शुभ) 9:12 AM – 10:44 AM
  • काल (अशुभ) 10:44 AM – 12:17 PM
  • शुभ (उत्तम) 12:17 PM – 1:50 PM
  • रोग (अशुभ) 1:50 PM – 3:23 PM
  • उद्वेग (अशुभ) 3:23 PM – 4:56 PM
  • चर (सामान्य) 4:56 PM – 6:29 PM

🌙 रात का चौघड़िया

  • रोग (अशुभ) 6:29 PM – 7:56 PM
  • उद्वेग (अशुभ) 7:56 PM – 9:23 PM
  • चर (सामान्य) 9:23 PM – 10:50 PM
  • लाभ (शुभ) 10:50 PM – 12:17 AM
  • अमृत (शुभ) 12:17 AM – 1:44 AM
  • काल (अशुभ) 1:44 AM – 3:12 AM
  • शुभ (उत्तम) 3:12 AM – 4:39 AM
  • रोग (अशुभ) 4:39 AM – 6:06 AM

🌞 सूर्य एवं चंद्र

🌅
सूर्योदय
6:06 AM
🌇
सूर्यास्त
6:29 PM
🌕
चंद्र अवस्था
पूर्णिमा 🌕
सूर्य राशि
मीन
🌙
चंद्र राशि
तुला
🔢
चंद्र अंशांश (निरयण)
182.59°

⏰ मुहूर्त एवं काल

🚫राहुकाल
10:44 AM – 12:17 PM

इस समय महत्वपूर्ण कार्य न करें।

⚠️यमगण्ड काल
3:23 PM – 4:56 PM

यमगण्ड काल में यात्रा व नए कार्य का प्रारंभ वर्जित।

🌑गुलिक काल
7:39 AM – 9:12 AM

शनि पुत्र गुलिक का काल — शुभ कार्य न करें।

अभिजित मुहूर्त
11:53 AM – 12:42 PM

दिन का सबसे शुभ मुहूर्त — सूर्य मध्याह्न।

ब्रह्म मुहूर्त
4:33 AM – 5:19 AM

ध्यान, पूजा, अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ।

🙏संध्या काल
6:29 PM के आसपास

संध्या वंदन व दीप प्रज्वलन शुभ।

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✨ आज का सुविचार

सत्य आत्मा का महान धर्म है।
इसे पाने वाला आत्मा कभी दुखी नहीं होता।

आज दिन की शुरुआत सत्य के संकल्प से करें।

— धर्मशास्त्र — 03 April 2026 का संदेश

प्रज्ञानं ब्रह्म। — प्रज्ञा ही ब्रह्म है।

— ऐतरेय उपनिषद् ३.३